Monday, January 19, 2009

पराक्रम, प्रमाणिकता और नातेदारी से मिलकर बना है पटना

आईये लखनऊ के बाद चलते हैं एक ऐसे प्रदेश की राजधानी में , जहाँ विभिन्न धर्मावालंवियों और पैगंबरों ने शान्ति, प्रेम , भाईचारे व् एकता का संदेश दिया था, वहीं अशोक महान , चन्द्रगुप्त मौर्य और विक्रमादित्य जैसे पराक्रमी राजाओं ने राज किया ।इस प्रकार पटना में पहला अक्षर "प" बोध कराता है पराक्रम का ।

महाभारत काल में मगध साम्राज्य को समृद्धि से जोड़कर विलाक्षनता का प्रमाण देने वाला शासक जरासंध , अपनी निपुणता तथा कुटनीतिक तर्कों के आधार पर व्यापक चिंतन सरोकार देने वाला चिन्तक चाणक्य और शून्य की संरचना करते हुए खगोल शास्त्र को प्रमाणिक आधार देने वाला अन्वेषक आर्यभट्ट को जन्म देकर यह भूमि विश्व में अपनी प्रमाणिकता को प्रतिविन्वित करती है । इस प्रकार पटना का दूसरा अक्षर "ट" वोध कराता है टकसाल यानी प्रमाणिकता का ।

यह वही भूमि है जहाँ विश्व विजेता सिकंदर महान की सफलता का रथ अचानक थम गया था । वहीं सिक्खों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह की जन्म स्थली पटना साहेब को प्राकट्य करके यह भूमि विश्व समुदाय में नातेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रमाणित करती है । भारत का यह एक मात्र ऐसा शहर है जहाँ कई महत्वपूर्ण संस्कृतियाँ एक साथ प्रवाहित होती है । इस प्रकार पटना का अन्तिम अक्षर "ना" विश्व वन्धुत्व अर्थात विश्व से नातेदारी का बोध कराता है ।

अर्थात पराक्रम , प्रमाणिकता और नातेदारी का एहसास कराता है यह पटना शहर ।

पटना का इतिहास काफी पुराना है जो पवित्र नदी गंगा के किनारे बसा हुआ है। पटना भारत के गौरवशाली शहरों में से एक है। इस शहर को ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी जाना जाता है। पटना का इतिहास पाटलीपुत्र के नाम से 5वीं सदी में शुरू होता है। तीसरी सदी ईसा पूर्व में पटना मगध की राजधानी बनी जहां के शासक महान सम्राट अशोक हुए। सम्राट अशोक के शासनकाल को भारत के इतिहास में महत्‍वपूर्ण स्‍थान प्राप्‍त है। चूंकि पटना से वैशाली, राजगीर, नालंदा, बोधगया और पावापुरी के लिए मार्ग जाता है, इसलिए यह शहर बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए गेटवे' के रूप में भी जाना जाता है। आजादी मिलने के बाद पटना बिहार राज्‍य की राजधानी बनी। पटना पर्यटन के लिहाज से एक प्रमुख स्‍थान है। यह वाणिज्यिक रूप से भी बिहार का एक प्रमुख शहर है। इसके अलावा महात्‍मा गांधी सेतु पटना को बिहार के अन्‍य पर्यटन स्‍थल से सड़क के माध्‍यम से जोड़ता है। यह पुल 7.5 किलोमीटर लंबा है। गोलघर, हरमंदिर, कुम्‍हरार आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्‍थल हैं।
पटना एक ओर जहां शक्तिशाली राजवंशों के लिए जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर ज्ञान और अध्‍यात्‍म के कारण भी यह काफी लोकप्रिय रहा है। यह शहर कई प्रबुद्ध यात्रियों जैसे
फाह्यान, ह्वेनसांग के आगमन का भी साक्षी है। कई इतिहासविद यह भी मानते हैं कि महानतम कूटनीतिज्ञ कौटिल्‍य ने यहीं पर अर्थशास्‍त्र की रचना की थी।

इस प्रकार यह शहर कई संस्कृतियों की पहचान है और इन्ही सब कारणों से मेरा भारत महान है !

5 comments:

रवीन्द्र प्रभात said...

सचमुच प्रणम्य है पाटलिपुत्र की यह भूमि !

गीतकार /geetkaar said...

पटना शब्द की अत्यन्त सार्थक व्याख्या आपने की है ! "प" से पराक्रमी "ट" से टकसाल और "ना" से नातेदारी . विचित्र किंतु सत्य ...../

पूर्णिमा said...

अच्छा लगा पटना के बारे इतना सब कुछ जानकर , शुक्रिया .

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

बहुत ही सुंदर और ज्ञानवर्धक लेख ! इसी तरह लिखती रहें .

(अगर आप बिना किसी हर्रे फिटकरी के कोरियन लैंगुएज सीखना चाहते हैं तो मेरे ब्लॉग http://koreanacademy.blogspot.com/ पर आएं |)

रंजीत said...

sanchipt,satik aur prashansniye.