Thursday, December 11, 2008

ताल तो भोपाल ताल , और सब तलैया .....!



कहते हैं , कि -

ग्यारहवीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने भोजपाल नगर बसाया , जो बिगड़कर भोपाल हो गया । लेकिन आज का भोपाल बसाया एक अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद ने, जो औरंगजेब की मृत्यु के बाद फ़ैली अराजकता में दिल्ली से भागकर कोई ठिकाना तलाश रहा था । सुन्दरी गोंड रानी कमलापति के पति की उसी दौरान ह्त्या कर दी गयी थी । उसने दोस्त मोहम्मद से मदद माँगी । भोपाल में १८१९ से १९२६ तक लगातार कई बेगमों का शासन रहा । भोपाल के नवाबों और बेगमों ने यहाँ कई शानदार इमारतें बनवाई । भोपाल का सबसे बड़ा आकर्षण तो यहाँ का ताल हीं है , जिसके बारे में कहा जाता है, कि -" ताल तो भोपाल ताल, और सब तलैया "

वैसे तो भोपाल के बारे में बताने के लिए हमारे पास बहुत है, लेकिन ज्यादा चर्चा कर मैं विषय से भटकना नहीं चाहती । लेकिन चलते-चलते इतना अवश्य बता देना चाहती हूँ कि आधुनिक भोपाल के महत्वपूर्ण स्थानों में है- जनजातीय कलाओं,शिल्पों,ललित कलाओं का प्रमुख केंद्र भारत भवन,भारत की विविध जीवन शैलियों और उनके घरों को हूँ-बहू दिखाने वाला मानव संग्राहालय , राजभवन , विधान सभा,लक्ष्मी नारायण मंदिर, गांधी भवन और ताल के पास बना सुन्दर वन विहार। भोपाल से ११कि0 मी० दूर इस्लाम नगर में दोस्त मोहम्मद का महल है । भोपाल से ४५ कि० मि० दूर रायसेन अपने मजबूत किले के लिए प्रसिद्द है , जिस पर यहाँ के राजा राय पूरन मोल को हराकर शेरशाह सूरी ने सोलहवीं शताब्दी में कब्जा कर लिया था । यकीनन भोपाल ग़ज़ब का शहर है.... !

भारत के ह्रदय प्रदेश की ह्रदय स्थली घूमने के बाद याद आती है दिल्ली कीr , जो हमाराh राष्ट्रीय स्वाभिमान है और इसी शहर से हम शंखनाद करते रहे हैं कि - मेरा भारत महान है .......!

अगले पोस्ट में मैं चर्चा करूंगी दिल्ली की , लिकिन उसके पहले लेती हूँ एक विराम , तब तक के लिए शुभ विदा !


7 comments:

गीतकार /geetkaar said...

आप जब किसी शहर के बारे में लिखती है,तो ऐसा लगता है की वह शहर आँखों के सामने प्रतिविंबित हो रहा हो ! गजब का प्रवाह है आपकी लेखनी में , एक महान कार्य को लेकर चल रही है आप , ऐसे अनवरत लिखते रहे, शुभ कामनाएं !

रवीन्द्र प्रभात said...

lagaataar achchhee jaanakaaree dee jaa rahee hai aapake dvaaraa .....aage kee kadion kaa intezar rahegaa

Shashwat Shekhar said...

Bhopal ke baare me padhkar ab apke dilli charcha ka intejaar rahega.

BrijmohanShrivastava said...

एतिहासिक जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

bahadur patel said...

bhopal ke bare me chitron ke sath aapne achchhi jankari prastut ki hai.

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

achchhi jankari ke liye dhanyawad.

mahendra mishra
jabalpur.m.p.

kumar Dheeraj said...

भोपाल को आपने खूबसूरत तरीके से पेश किया है । आप इस शहर पर इस कदर मेहरबान हुई है कि उसके हर किस्से को एक अंदाज में लिख दी है । तस्वीर के साथ भोपाल को पढ़ना बहुत अच्छा लगा । लिखते रहिए