

कहते हैं , कि -
ग्यारहवीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने भोजपाल नगर बसाया , जो बिगड़कर भोपाल हो गया । लेकिन आज का भोपाल बसाया एक अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद ने, जो औरंगजेब की मृत्यु के बाद फ़ैली अराजकता में दिल्ली से भागकर कोई ठिकाना तलाश रहा था । सुन्दरी गोंड रानी कमलापति के पति की उसी दौरान ह्त्या कर दी गयी थी । उसने दोस्त मोहम्मद से मदद माँगी । भोपाल में १८१९ से १९२६ तक लगातार कई बेगमों का शासन रहा । भोपाल के नवाबों और बेगमों ने यहाँ कई शानदार इमारतें बनवाई । भोपाल का सबसे बड़ा आकर्षण तो यहाँ का ताल हीं है , जिसके बारे में कहा जाता है, कि -" ताल तो भोपाल ताल, और सब तलैया "
वैसे तो भोपाल के बारे में बताने के लिए हमारे पास बहुत है, लेकिन ज्यादा चर्चा कर मैं विषय से भटकना नहीं चाहती । लेकिन चलते-चलते इतना अवश्य बता देना चाहती हूँ कि आधुनिक भोपाल के महत्वपूर्ण स्थानों में है- जनजातीय कलाओं,शिल्पों,ललित कलाओं का प्रमुख केंद्र भारत भवन,भारत की विविध जीवन शैलियों और उनके घरों को हूँ-बहू दिखाने वाला मानव संग्राहालय , राजभवन , विधान सभा,लक्ष्मी नारायण मंदिर, गांधी भवन और ताल के पास बना सुन्दर वन विहार। भोपाल से ११कि0 मी० दूर इस्लाम नगर में दोस्त मोहम्मद का महल है । भोपाल से ४५ कि० मि० दूर रायसेन अपने मजबूत किले के लिए प्रसिद्द है , जिस पर यहाँ के राजा राय पूरन मोल को हराकर शेरशाह सूरी ने सोलहवीं शताब्दी में कब्जा कर लिया था । यकीनन भोपाल ग़ज़ब का शहर है.... !
भारत के ह्रदय प्रदेश की ह्रदय स्थली घूमने के बाद याद आती है दिल्ली कीr , जो हमाराh राष्ट्रीय स्वाभिमान है और इसी शहर से हम शंखनाद करते रहे हैं कि - मेरा भारत महान है .......!
अगले पोस्ट में मैं चर्चा करूंगी दिल्ली की , लिकिन उसके पहले लेती हूँ एक विराम , तब तक के लिए शुभ विदा !




